मेरे दोसतो जीवन जो मनुस्य को मिला है उसमे हिर्दय रूपी हंस को बी तृप्तय होने के मौका देना चाहिए क्योकि संसार में सभी कार्यो के लिए तो बागमभग लगा हुआ है लेकिन इसके साथ भी मनुष्य शुखी सन्ति महसूश नहीं करता है इस लिए हिर्दय के गुरु के पास आईएए और अपने हंस को आजादी से मुक्ति दे।।।।।।
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